न्यूयार्कवासियों से 6 गुना अधिक खर्च करते हैं भारतीय खान-पान पर

नई दिल्ली। भारतीयों ने खाने-पीने के मामले में न्यूयार्कवासियों को पीछे छोड़ दिया है। भारतीय औसतन हर दिन अपनी दैनिक आय का 3.5 प्रतिशत खाने की थाली पर खर्च करते हैं। वहीं वहीं न्यूयॉर्क के नागरिक दैनिक आय का 0.6 प्रतिशत ही खाने की थाली पर खर्च करते हैं। यह दावा संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के विष्व खाद्य कार्यक्रम द्वारा शुक्रवार को जारी रिपोर्ट में किया गया है।
इस रिपोर्ट के अनुसार, भोजन की सबसे मंहगी थाली दक्षिणी सूडान की है, जहां लोगों को दैनिक आय का 86 प्रतिशत जरूरी सामग्री पर खर्च करना होता है। खाने पर खर्च को लेकर दुनिया के 36 देशों की सूची में भारत 28वें स्थान पर है। रिपोर्ट में कहा गया कि भारतीय हर दिन भोजन की थाली पर अपनी दैनिक आय का 3.5 प्रतिशत खर्च करते हैं। वहीं न्यूयॉर्क के नागरिक हर दिन अपनी भोजन की थाली पर अपनी दैनिक आय का 0.6 प्रतिशत ही खर्च करते हैं। रिपार्ट में सामने आया कि उप-सहारा अफ्रीका के देश इस क्षेत्र में शीर्ष 20 में से 17वें स्थान पर हैं। इसमें कहा गया कि इन देशों में ज्यादातर खाद्य सामग्री बाहर से आयात की जाती है, जो आर्थिक रूप से विश्व में इन देशों को कमजोर बनाती है। इसके चलते इन देशों में भुखमरी जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। श्रमिकों के लिए दो वक्त का भोजन जुटाना भी मुश्किल हो जाता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि विकासशील देशों के नागरिकों को विकसित देशों की तुलना में भोजन के लिए अधिक श्रम करना पड़ता है। इसके अलावा जलवायु परिवर्तन ने कई देशों में लोगों का भोजन के प्रति संघर्ष और बढ़ा दिया है। जिन देशों में लोगों की आजीविका खेती पर निर्भर है, वहां जलवायु परिवर्तन के चलते उपज कम हो रही है। वहीं ये लोग परिवार को खिलाने के लिए अनाज व अन्य खाद्य सामग्री खरीदने में असमर्थ होते हैं। अब वैश्विक महामारी कोरोना वायरस कम आय वाले श्रमिकों के सामने नई चुनौतियां दी हैं। दुनिया में गरीबों के लिए भोजन जुटाना और कठिन होता जा रहा है।

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