इंदौर। गुड़ी पड़वा में ‘गुड़ी’ शब्द का अर्थ है ‘विजय पताका’ और पड़वा का अर्थ है प्रतिपदा तिथि। चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को गुड़ी पड़वा पर्व के मौके पर प्रत्येक घर में विजय के प्रतीक स्वरूप गुड़ी सजाई जाती है। गुड़ी पड़वा त्योहार इस साल 13 अप्रैल को मनाया जाएगा।
गुड़ी पड़वा पर्व गोवा, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के कई राज्यों में मनाया जाता है। इस दिन से हिंदू नववर्ष की शुरुआत होती है। साथ ही नवरात्र पर्व का आरंभ भी इसी दिन से होता है। गुड़ी पड़वा को फसल दिवस के रूप में मनाते हैं। गुड़ी पड़वा को भारत के दक्षिणी प्रांतों में उगादी भी कहा जाता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि का निर्माण किया था।
गुड़ी पड़वा का मुहूर्त
13 अप्रैल से मराठी शक सम्वत 1943 प्रारम्भ
प्रतिपदा तिथि प्रारम्भ- अप्रैल 12, 2021 को सुबह 08:00 बजे
प्रतिपदा तिथि समाप्त- अप्रैल 13, 2021 को सुबह 10:16 बजे
गुड़ी पड़वा से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य
*गुड़ी पड़वा में ‘गुड़ी’ शब्द का अर्थ ‘विजय पताका’ और पड़वा का अर्थ प्रतिपदा तिथि। चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को गुड़ी पड़वा पर्व के मौके पर प्रत्येक घर में विजय के प्रतीक स्वरूप गुड़ी सजाई जाती है। कहा जाता है कि इस दिन अपने घर को सजाने और गुड़ी फहराने से घर में सुख समृद्धि आती है और बुराइयों का नाश होता है।
*इस पर्व को बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है क्योंकि मराठियों के लिए ये पर्व नए साल की शुरुआत होती है। इस दिन फसल की पूजा भी की जाती है।
*इस दिन लोग अपने घरों की साफ-सफाई करते हैं तथा रंगोली बनाते हैं। साथ ही इस खास मौके पर लोग अपने घरों के गेट पर आम के पत्तों से बंदनवार बनाकर सजाते हैं। गुड़ी पड़वा पर महिलाएं अपने घर के बाहर गुड़ी लगाती हैं।
*गुड़ी पड़वा के त्योहार पर लोग पूरन पोली बनाते हैं जो महाराष्ट्र का जाना माना पकवान होता है।
*इस दिन घर में गुड़ी लाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि ये घर की सुख-समृद्धि को बढ़ाता है तथा नकारात्मक चीजों को घर से दूर रखता है।
*इस पर्व को लेकर ये भी प्रचलित है कि इस दिन रावण का विनाश करने के बाद भगवान राम माता सीता को लेकर अपनी नगरी अयोध्या लौटे थे।
*पौराणिक कथाओं के मुताबिक, युद्ध में जीत मिलने के बाद मराठों के प्रख्यात राजा छत्रपति शिवाजी ने ही पहली बार गुड़ी पड़वा का पर्व मनाया था। तभी से हर एक मराठा इस पर्व को हर साल मनाता है।
*गुड़ी पड़वा पर नीम की पत्तियों को खाने की परंपरा है। ऐसा कहा जाता है कि गुड़ी पड़वा पर नीम की पत्तियों का सेवन करने से खून साफ होता है जिससे इंसान रोग मुक्त रहता है।

