आदित्य धेप्ते
उज्जैन। एक बार फिर बाबा महाकाल भक्तों से मिलने निकले। भादौ मास की दूसरी और अंतिम सवारी में प्रभु एक ही रथ पर पांच स्वरूप में अपनी प्रजा का हाल जानने नगर भ्रमण पर निकले। इस शाही सवारी के पहले प्रभु महाकालेश्वर सावन माह में पांच बार और भादौ मास में एक बार अपने सेवकों का हाल जानने नगर भ्रमण कर चुके हैं।
प्रभु की शाही सवारी सोमवार शाम 4 बजे महाकाल मंदिर से रवाना हुई। इस सवारी के पहले विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर के शिखर ध्वज को बदला गया है। गौरतलब है कि परंपरा अनुसार प्रत्येक शाही सवारी के पहले शिखर ध्वज को बदला जाता है। इस बार सवारी में प्रभु ने 7 स्वरूपों में भक्तों को दर्शन दिए। शाही सवारी के दौरान धार्मिक नृत्य नाटिकाओं का आयोजन भी किया गया। सवारी मार्ग को रंग-बिरंगी पताकाओं से सजाया गया था। हरसिद्धि चौराहे पर देवी की विशाल प्रतिमा भक्तों के आकर्षण का केंद्र बनी, वहीं सवारी के दौरान अनेक स्थानों पर इलेक्ट्रॉनिक आतिशबाजी की गई। सवारी के दौरान हरसिद्धि पर महाकालेश्वर की शिप्रा आरती की तर्ज पर महाआरती की गई। रामघाट तट पर अभिषेक और पूजन के बाद प्रभु महाकाल अपने धाम को लौट गए।

