रागिनी दुबे
इंदौर। स्वच्छता सर्वेक्षण-2020 में इंदौर को देश का सबसे स्वच्छ शहर घोषित किया गया है। इसके साथ ही इंदौर ने लगातार चौथी बार स्वच्छता में देश में अव्वल स्थान हासिल किया है। दिल्ली में शहरी विकास विभाग के कैबिनेट मंत्री हरदीप पुरी ने दिल्ली में जैसे ही स्वच्छ शहरों की सूची जारी की, इंदौर का हर नागरिक गर्व के साथ झूम उठा। गौरतलब है कि इंदौर ने पहली बार 2017 में पहला स्थान हासिल किया था, उसके बाद से ये सिलसिला लगातार जारी है। इस सफलता को हासिल करने में सबसे बड़ा योगदान सफाई कर्मियों का है, जिन्होंने कोरोना काल में भी अपनी जान की परवाह किये बिना शहर को स्वच्छ बनाए रखा।
गुरुवार को दिल्ली में ऑनलाइन कार्यक्रम में परिणाम की घोषणा की गई। दूसरे नंबर पर गुजरात का सूरत और तीसरे नंबर महाराष्ट्र का नवी मुंबई है। स्वच्छता सर्वेक्षण-2020 लीग के तीनों क्वार्टर में भी इंदौर अव्वल रहा था। मध्य प्रदेश को इस सूची में कुल 10 स्थान मिले । इनमें इंदौर के अलावा भोपाल, जबलपुर, बुरहानपुर, रतलाम, उज्जैन नगर निगम , सिहोरा नगर पालिका , शाहगंज, कांटाफोड नगर पिऱषद और छावनी परिषद महू कैंट शामिल हैं।

6 हजार में से इंदौर को मिले 5647.56
इस सर्वेक्षण के प्रमुख घटक अपशिष्ट संग्रहण और परिवहन, प्र-संस्करण एवं निष्पादन, संवहनीय स्वच्छता और नागरिकों की सहभागिता और नवाचार आदि प्रमुख घटकों को शामिल किया गया था। इन घटकों में कुल 6000 अंकों के आधार पर भारत सरकार द्वारा अधिकृत स्वतंत्र संस्था द्वारा मैदानी मूल्यांकन तथा जनता के फीडबैक के आधार पर अंतिम परिणाम प्रकाशित किए गए हैं।
मध्यप्रदेश के 378 शहरों का बेहतर प्रदर्शन
स्वच्छ सर्वेक्षण-2020 के घटकों में मध्यप्रदेश के 378 शहरों ने अपना बेहतर प्रदर्शन किया। इसमें शहरों में स्वच्छता, साफ-सफाई, आधारभूत संरचनाओं का निर्माण तथा उनका प्रबंधन, ठोस अपशिष्ट का प्रबंधन और शहरों की स्वच्छता बनाए रखने में नागरिकों का सहयोग प्राप्त करने के प्रयास प्रमुखता से किए गए। इन्हीं प्रयासों के परिणाम स्वरूप खुले में शौच से मुक्त राज्य का गौरव प्राप्त किया और हमारे 234 शहर ओडीएफ$ और 107 शहर ओडीएफ$$ के परीक्षण में सफल हुए हैं। इसी क्रम में कचरा मुक्त शहर के मूल्यांकन में राज्य के 18 निकाय स्टार रेटिंग प्राप्त करने में सफल रहे हैं, जो देश में सर्वाधिक शहरों के मामलों में द्वितीय स्थान है। उल्लेखनीय है कि विगत तीन सर्वेक्षणों में भी मध्यप्रदेश के 20 शहर देश के सर्वश्रेष्ठ 100 शहरों में रहे हैं।
कामयाबी का सफर
2017 : पहली बार नंबर वन बनने के लिए इंदौर ने घर-घर से कचरा उठाने का अभियान चलाया। इसके लिए स्पेशल कचरा गाड़ियों खरीदी गईं। निगम के ऐसा करने से शहर की कचरा पेटियों गायब हो गईं।
2018 : दूसरी बार नंबर वन के लिए इंदौर ने एक और कदम आगे बढ़ाते हुए ट्रेंचिंग ग्राउंड तक पहुंचे वाले कचरे को अलग-अलग करने की प्लानिंग की। इसके तहत घर से ही गीला और सूखा कचरा छांटने को कहा गया। इसके लिए दो अलग-अलग डस्टबिन रखने की तैयारी की गई। इसके साथ ही शहर को शौच मुक्त बनाने का भी अभियान छेड़ दिया गया।
2019 : यह साल इंदौर के लिए नाक का सवाल था, क्योंकि हर इंदौरी चाहता था हम हैट्रिक लगाएं। इसके लिए निगम ने शहर को स्वच्छ करने के साथ ही रंगरोगन का बीड़ा उठाया। ट्रेंचिंग ग्राउंड में कचरे के निपटान की प्रक्रिया को तेज करने के लिए प्लांट स्थापित किया गया, जहां गीला और सूखा कचरा अलग-अलग तरीके से निपटान किया जाने लगा। इसके साथ ही ट्रेंचिंग ग्रांउड पर पड़ा लाखों टन कचरे का भी निपटान किया गया।
2020 : स्वच्छता का पर्याय बन चुके इंदौर के लिए यह साल बड़ा चुनौती भरा रहा। क्योंकि अब दूसरे शहर वाले हमारे यहां की सफाई देखने आने लगे थे। ऐसे में इंदौर ने सफाई को आदत के साथ ही आमदनी का जरिया भी बना डाला। अब इंदौर की सफाई देखने के लिए प्रति व्यक्ति 7 हजार रुपए लगने लगे।

