चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी को जनता को स्वयं बताना होगी अपनी आपराधिक पृष्ठभूमि

नई दिल्ली|भारतीय निर्वाचन आयोग ने चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों द्वारा उनके आपराधिक इतिहास को सार्वजनिक करने को लेकर संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए हैं। शुक्रवार को जारी इन दिशा-निर्देशों में प्रत्याशियों के साथ उन्हें चुनावी मैदान में उतारने वाली पार्टी को भी कुछ नियमों का पालन करने के लिए कहा गया है। 

चुनाव आयोग ने यह फैसला बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले लिया है। इससे पहले आयोग ने अक्तूबर 2018 में चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों और उन्हें खड़ा करने वाले दलों के लिए यह अनिवार्य करने का निर्देश दिया था कि चुनाव प्रचार के दौरान कम से कम तीन बार टीवी और अखबारों में अपनी आपराधिक पृष्ठभूमि के विज्ञापन प्रकाशित कराएं।  संशोधित दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रत्याशी और उनकी पार्टी को उम्मीदवार के आपराधिक विवरण (यदि कोई हो तो) को समाचार पत्र और टेलीविजन में प्रकाशित करवाना होगा। ऐसा तीन बार करना होगा। उम्मीदवार के आपराधिक विवरण का पहली बार प्रकाशन नाम वापसी की अंतिम तारीख के पहले चार दिनों के भीतर करवाना होगा। दूसरी बार नाम वापसी की अंतिम तारीख के पांचवे से आठवें दिन के भीतर प्रकाशित करवाना होगा। इसके अलावा तीसरी बार प्रचार के नौवें दिन से अंतिम दिन तक उम्मीदवार के आपराधिक विवरण का प्रकाशन करवाना होगा। निर्विरोध रूप से जीतने वाले प्रत्याशी और उसकी पार्टी को भी आपराधिक इतिहास (अगर कोई हो तो) से जुड़ी जानकारी प्रकाशित करवानी होगी।

आयोग ने एक बयान में कहा, ‘यह समयसीमा मतदाताओं को उनकी पसंद के प्रत्याशी को चुनने में मदद करेगी।’ आगामी बिहार विधानसभा चुनाव और आने वाले दिनों में 64 विधानसभा और एक लोकसभा सीट पर होने वाले उपचुनावों में प्रत्याशियों को अपने आपराधिक इतिहास के बारे में विज्ञापन करते समय नयी समयसीमा का पालन करना होगा।

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