उज्जैन। कार्तिक-अगहन मास में सोमवार को भाईदूज के संयोग में भगवान महाकाल की पहली सवारी निकली। इस बार सवारी परंपरागत मार्ग से निकाली गयी। मंदिर के सभामंडप में प्रशासक व एडीएम नरेंद्रसिंह सूर्यवंशी ने भगवान महाकाल के मनमहेश रूप का पूजन कर पालकी को नगर भ्रमण के लिए रवाना किया। मंदिर के मुख्य द्वार पर सशस्त्र बल की टुकड़ी ने राजाधिराज को सलामी दी इसके बाद पालकी शिप्रा तट की ओर रवाना हुई। सवारी में सबसे आगे पुलिस का अश्वरोही दल, सशस्त्र बल की टुकड़ी तथा सुरक्षा घेरे के बीच बाबा महाकाल की पालकी शामिल थी। महाकाल पेढ़ी पर पुजारियों ने पालकी में विराजित भगवान महाकाल का शिप्रा जल से अभिषेक कर पूजा-अर्चना की। इसके बाद सवारी मंदिर लौट गयी।
हरि-हर मिलन से भक्त अभिभूत

मंदिर की परंपरा अनुसार श्रावण-भादौ व कार्तिक-अगहन मास में महाकाल की सवारी निकलने पर गोपाल मंदिर के मुख्य द्वार पर मंदिर के पुजारी भगवान महाकाल की पूजा-अर्चना करते हैं। यह परंपरा हरि-हर मिलन के नाम से जानी जाती है। श्रावण-भादौ मास में नए मार्ग से सवारी निकलने के कारण हरि-हर मिलन नहीं हो पाया था। कार्तिक मास के पहले सोमवार को परंपरागत मार्ग से निकली सवारी में गोपाल मंदिर पर मौजूद सैकड़ों भक्त हरि-हर मिलन के दृश्य को देखकर अभिभूत हो गए।
वैकुंठ चतुर्दशी पर 28 नवंबर को गोपाल मंदिर में हरि और हर का मिलन होगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार देव उत्थापनी एकादशी पर देव शक्ति जागृत होने के बाद ‘हर बाबा महाकाल सृष्टि का भार पुन: ‘हरि गोपालजी को सौंपने गोपाल मंदिर जाते हैं। इस दिन परंपरा अनुसार रात 11 बजे महाकाल मंदिर से अवंतिकानाथ की सवारी निकलती है। मध्यरात्रि 12 बजे के बाद गोपाल मंदिर में हरि-हरि मिलन होता है।
निकलेंगी छह सवारियां
मंदिर प्रशासन के अनुसार कार्तिक-अगहन मास में बाबा महाकाल की छह सवारियां निकलेंगी। 14 दिसंबर को सोमवती अमावस्या के महासंयोग मेंशाही सवारी निकाली जाएगी।


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