Garima Dubey
इंदौर|दुनियाभर में आज प्रभु यीशु का जन्मोत्सव क्रिसमस मनाया जा रहा है। कोरोना संक्रमण के कारण इंदौर शहर में इस बार 24-25 दिसंबर मध्यरात्रि को होने वाली प्रभु यीशु की आराधना इस बार सूरज ढलने के साथ ही हो गई। घंटियों की कर्णप्रिय ध्वनि के बीच कैरोल गायन के साथ मिस्सा अर्पित किया गया। क्रिसमस के लिए शहर के व्हाइट चर्च, रेड चर्च सहित सभी 12 कैथोलिक और नॉन कैथोलिक गिरजाघरों में विषेष सजावट की गयी। इंदौर धर्म प्रांत के बिशप डॉ. चाको ने रेडियो इंदौर को बताया कि कोरोना संक्रमण से लोगों को बचाने के लिए इस बार सीमित संख्या में भक्तों को गिरजाघर आने की अनुमति दी गई है। आज सुबह पवित्र मिस्सा अर्पित करने के बाद गिरजाघर बंद कर दिए जाएंगे। 26 दिसंबर से गिरजाघर खोल दिए जाएंगे। इस अवसर पर उन्होंने अपने शुभकामना संदेश में कहा-

शहर के गिरजाघर
* 9 कैथोलिक गिरजाघर हैं इंदौर में
* 3 प्रमुख नॉन कैथोलिक गिरजाघर हैं शहर में
* 200 नॉन कैथोलिक होम चर्च भी हैं
ये हैं कैथोलिक गिरजाघर
* 1892 में बना था संत फ्रांसिस असिसी कैथेड्रल (रेड चर्च)। यह शहर का पहला कैथोलिक गिरजाघर है। इसके बाद सेवा कार्य के रूप में स्कूल, हॉस्पिटल और कॉलेज बनाए गए।
* 1966 में बना संत जोसफ गिरजाघर, नंदा नगर
* 1980 में बना संत टेरेसा गिरजाघर, पुष्प नगर
* 1997 में बना संत अरनॉल्ड गिरजाघर, विजय नगर
* 1998 में बना सेंट नॉरबर्ट गिरजाघर, कैट रंगवासा
* 2003 में बना इंफेंट जीसस गिरजाघर, छोटा बांगड़दा
* 2007 में बना होली फैमिली गिरजाघर, पिपलियाकुमार
* 2010 में बना संत विंसेंट पलोटी गिरजाघर, सुखलिया
* 2013 में बना होली स्पिरिट गिरजाघर, पालदा
नॉन कैथोलिक गिरजाघर
* सेंट एन्स गिरजाघर (व्हाइट गिरजाघर) – शहर का यह सबसे प्राचीन गिरजाघर है। इसका निर्माण 1887 में आरएनसी हैमिल्टन ने कराया था। इमारत का सफेद रंग होने के कारण इसे व्हाइट गिरजाघर कहा जाने लगा। इसे बनाने में करीब एक वर्ष का समय लगा था।
* प्रेस बिटेरियन गिरजाघर (मसीह मंदिर छावनी) का निर्माण 1926 में हुआ था।
* बजरंग नगर में करीब 25 साल पहले संत पोलुस गिरजाघर बना।

