प्रकृति का दोहन व शोषण ही विनाश का कारण:पं वीरेंद्र व्यास

निशिकांत मंडलोई

इंदौर। भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पूजा के माध्यम से मानव जगत को संदेश दिया है कि प्रकृति मेरा ही स्वरूप है इसलिए तुम प्रकृति का सम्मान करो। मनुष्य जब जब प्रकृति का दोहन और शोषण करेगा तब तब वो विनाश को ही प्राप्त करेगा। हाल ही में उत्तराखंड में हुई त्रासदी इस बात का प्रमाण है।यह बात सत्यदेव नगर में चल रही भागवत कथा में व्यास पीठ से पंडित वीरेंद्र व्यास ने कही। वे कथा प्रसंग अनुसार गोवर्धन पूजन  का महत्व शृद्धालुओं को बता रहे थे।

आपने भगवान की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए कहा  कि भगवान राम  मानव रूप में मर्यादित जीवन जी कर मर्यादा पुरषोत्तम कहलाए  वहीं कृष्ण अपनी लीलाओं के माध्यम से लीलाधर कहलाए।पूतना वध को बताते हुए कहा कि  पूतना कोई और  नहीं वासना ही है जीवन में इंसान केवल  अपनी वासना को नष्ट कर लेता है तो भी वह श्री चरणों में स्थान पाने योग्य हो जाता है।द्रोपदी चीरहरण पर कहा की जिसका तन  की सुरक्षा स्वयं भगवान ने कर दी हो तो उसको संसार में कोई भी वस्त्र विहीन नहीं कर सकता।कथा में आज गोवर्धन पूजा कर भगवान को छप्पन भोग अर्पित भजनों पर नृत्य किया तथा मयूर नृत्य का आनंद भी लिया।आज कथा में केंद्रीय साई समिति इंदौर के सदस्यों ने व्यास पीठ का पूजन कर कथाकार पं व्यास से आशीष प्राप्त किया। बुधवार को रुक्मणी मंगल व गुरुवार को सुदामा चरित्र के साथ कथा व यज्ञ की पुर्णाहुति होगी।

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