राजनीति में महिलाओं के आरक्षण का लाभ संपूर्ण समाज को

‘‘राजनीति में नया सवेरा’’ विषय पर स्टेट प्रेस क्लब, म.प्र. में समूह चर्चा का आयोजन

रागिनी दुबे, इंदौर। स्टेट प्रेस क्लब, म.प्र. ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन करने के लिए आहूत तीन दिवसीय विशेष सत्र पर केन्द्रित समूह चर्चा “राजनीति में नया सवेरा” का आयोजन किया। समूह चर्चा में वक्ताओं ने लोकसभा-विधानसभा चुनाव में जल्द अवसर देने के लिए किए जा रहे प्रयासों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार जताया और कहा कि महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण की दिशा में यह ऐतिहासिक कदम साबित होगा।

अभिनव कला समाज सभागार में आयोजित समूह चर्चा में विषय प्रवर्तन करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. स्वाति तिवारी ने कहा कि जब महिलायें देश-दुनिया के हर क्षेत्र में आगे हैं तो राजनीति में पीछे क्यों रहें? प्रकृति ने जिसे सृजन की क्षमता दी है उससे बेहतर समाज कौन चला सकता है। पुरुषों से कहीं आगे का देख लेती हैं महिलाएं। इस फैसले से केवल राजनीतिक दलों को ही नहीं वरन संपूर्ण महिला समाज को लाभ मिलेगा। चिकित्सक डॉ. विनीता कोठारी ने कहा कि राजनीति में सफल होने के लिए महिलाओं को हर क्षेत्र का अध्ययन करना होगा। बात राजनीति में आने भर की नहीं बल्कि सफल होने की है। डॉ. अरविंदर कौर सबरवाल ने कहा कि अब जब राजनीति में आरक्षण की बात चल रही है तो सभी दलों को ख्याल रखना होगा कि आरक्षण का लाभ कुछ परिवारों की जगह योग्य महिलाओं तक पहुंचे। क्षत्रिय मराठा महिला संगठन की राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वाति युवराज काशिद ने कहा कि वर्तमान में देश की संसद में महिलाओं का प्रतिशत 14 है जो बढ़कर 33 प्रतिशत हो जाएगा। जब देश का नेतृत्व महिला राष्ट्रपति और ऑपरेशन सिन्दूर का नेतृत्व महिला कर सकतीं हैं तो राजनीति में भी हम कामयाब होकर दिखायेंगे। विश्व हिंदू परिषद् मातृशक्ति विभाग की सह-संयोजिका ज्योति श्रीवास्तव ने कहा कि नरेंद्र मोदी ने साहसिक कदम उठाते हुए समय से पहले ही महिलाओं को राजनीति में सम्मानजनक स्थान देने का प्रयास किया है। उम्मीद है तीन दिवसीय विशेष सत्र में आवश्यक संसोधनों के साथ 33 प्रतिशत आरक्षण का बिल पारित होकर लोकसभा-विधानसभा चुनाव पर लागू हो जाएगा। साहू समाज की अध्यक्ष एवं अधिवक्ता भावना साहू ने कहा कि शिव-शक्ति के बगैर संसार की कल्पना ही नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि वर्षों से महिलाओं के साथ भेद-भाव होता आया है उसके बावजूद हर क्षेत्र में महिलाओं ने स्वयं को सिद्ध किया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि राजनीति में भी बढे हुए अवसर महिलाओं का बेहतर चेहरा सामने लाने में मददगार साबित होगे। अधिवक्ता स्वाति मेहता ने कहा कि यूँ तो महिला आरक्षण की बात चालीस सालों से चल रही हैं। पहले पंचायत और स्थानीय निकायों में महिलाओं को आरक्षण मिला। अब विधानसभा और लोकसभा की बारी है। उन्होंने प्रधानमंत्री को बधाई दी कि लंबा इन्तजार करवाने की बजाए वे विशेष सत्र बुलाकर इस संकल्प को अंजाम तक पहुँचाना चाहते हैं। कार्यक्रम को वरिष्ठ पत्रकार रचना जौहरी, शीतल राय, डॉ. सुनीता श्रीवास्तव, महिला कांग्रेस कमेटी की पूनम मिमरोट एवं भाजपा नेता शिवानी अड़सपुरकर ने भी संबोधित किया। 

महिला आरक्षण को लेकर उठाये गए क़दमों की जानकारी

प्रारंभ में स्टेट प्रेस क्लब, म.प्र. के अध्यक्ष प्रवीण खारीवाल ने महिला आरक्षण को लेकर 1975 से लेकर 2023 तक उठाये गए क़दमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विशेष सत्र बुलाकर सरकार नारी शक्ति वंदन अधिनियम विधेयक में संशोधन करना चाहती है। सरकार चाहती है 2011 की जनगणना-परिसीमन के आधार पर वर्ष 2029 के लोकसभा चुनाव से 33 प्रतिशत सीटों का आरक्षण लागू हो जाये। कार्यक्रम का संचालन पंकज क्षीरसागर ने किया। वूमंस प्रेस क्लब, म.प्र. की अध्यक्ष शीतल राय ने आभार व्यक्त किया।

टिप्पणी करे