4 सितम्बर को मनाया जायेगा कृष्ण जन्मोत्सव

इंदौर|जन्माष्टमी का पर्व भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान कृष्ण का प्राकट्य हुआ था। भगवान कृष्ण ने द्वापर युग में माता देवकी और पिता नंदन के घर अवतार लिया था। जन्माष्टमी के पर्व पर भगवान कृष्ण के बाल स्वरुप की पूजा की जाती है।
क्या कहती है पंचांग की गणना
    पंचांग की गणना के आधार पर जन्माष्टमी का पर्व इस साल 4 सितंबर को मनाया जाएगा। इस बार जन्माष्टमी पर जन्मांतर के पापों को नष्ट करने वाला जयंती योग बना है। पंचांग की गणना के अनुसार, 3 सितंबर को अष्टमी तिथि का आरंभ 3 सितंबर को रात में 12 बजकर 26 मिनट पर होगा और 4 सितंबर को अष्टमी तिथि का समापन रात में 12 बजकर 14 मिनट पर होगा। जन्माष्टमी का पर्व उस दिन मनाना शुभ रहता है जब चंद्रमा रोहिणी नक्षत्र में हो। रोहिणी नक्षत्र का आरंभ 3 सितंबर को रात में 11 बजकर 30 मिनट पर होगा और 4 सितंबर को रात में 12 बजकर 14 मिनट तक रोहणी नक्षत्र रहेगा।

जन्माष्टमी का पर्व का महत्व और महिमा

श्रीमद्भागवत, भविष्यादि सभी पुराणों के अनुसार भगवान् श्रीकृष्ण का जन्म भाद्र कृष्ण अष्टमीतिथि, बुधवार, रोहिणी नक्षत्र और वृष के चन्द्रमा-कालीन अर्द्धरात्रि के समय हुआ था। जन्माष्टमी का पर्व रोहिणी नक्षत्र और भाद्रपद अष्टमी तिथि के संयोग के साथ साथ अगर जन्माष्टमी बुधवार या सोमवार को हो तो ये बहुत ही अति उत्तम संयोग माना जाता है। इस बार 4 सितंबर को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन अर्द्धरात्रिव्यापिनी अष्टमी तिथि, शुक्रवार, रोहिणी नक्षत्र और वृषस्थ चन्द्रमा का दुर्लभ और पुण्यप्रदायक योग बन रहा है।

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