जानिए खरमास का हमारे जीवन पर प्रभाव

इस बार 13 अप्रैल को होगा खरमास समाप्त

यशिका दुबे। हिन्दु धर्म की परंपराओं में खरमास का अपना महत्व है। खरमास को मलमास भी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, खरमास के दौरान सूर्य देव की ऊर्जा और तेज कमजोर हो जाता है, इसलिए इस दौरान शुभ कार्य नहीं किए जाते। खरमास का समापन 13 अप्रैल को सूर्य के मेष राशि में गोचर के साथ समाप्त होगा। 14 अप्रैल को खरमास खत्म होते ही सभी मांगलिक कार्य शुरु हो जाएंगे।

मेष संक्रांति के बाद 14 अप्रैल से शादी-विवाह और गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य प्रारंभ हो जाएंगे। गौरतलब है कि होली के बाद खरमास 14 मार्च से आरंभ हुआ था। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार खरमास में सूर्य मीन राशि में रहते हैं तब तक शुभ कार्य नहीं होते हैं। उसके बाद सूर्य के मेष राशि में आने पर खरमास समाप्त होता है और शुभ कार्य आरंभ हो जाते हैं।

खरमास में शुभ कार्य क्यों नहीं

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार खरमास में ग्रहों की नकारात्मक ऊर्जा प्रभावशाली रहती है। सूर्य जब मीन राशि में या फिर धनु राशि में होते हैं तो उनकी ऊर्जा काफी कम होती है और हिंदू परंपरा के अनुसार शुभ कार्य के लिए सूर्य का तेजस्वी होना जरूरी है। भगवान सूर्यदेव 13 अप्रैल को उच्च राशि मेष में आकर आदित्यन योग बनाएंगे और उनकी सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि होती है। खरमास में शुभ कार्य करने पर व्यवधान की संभावना बनी रहती है।

पौराणिक मान्यता

पौराणिक मान्यता में सूर्यदेव पृथ्वी पर जीवन के दाता माने गये हैं। सूर्य प्रकाश और उष्मीय ऊर्जा से प्रकृति जुड़ी हुई हैं। सूर्य जब बृहस्पति की राशियों में प्रवेश करते हैं, तो उनका तेज कम हो जाता है। सूर्य का तेज होना मांगलिक करने के लिए उत्तम नहीं माना जाता है। इसलिए इस दौरान लोग मांगलिक कार्य नहीं करते हैं। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को सभी ग्रहों का राजा माना गया है। सूर्यदेव पिता पक्ष का प्रतिनिधित्व करते हैं इसलिए खरमास लगने पर सूर्य का तेज कम होने को सौर परिवार के मुखिया की स्थिति के समान माना जाता है।

खरमास में करे भगवान विष्णु और सूर्य पूजन

खरमास में भगवान विष्णु की पूजा करने से ग्रहों की स्थिति अच्छी रहती है।  भगवान विष्णु को पीले भोजन का भोग लगाकर विधिवत पूजा करनी चाहिए। ऐसा करने से कुंडली में गुरु की स्थिति मजबूत होती है। खरमास में सूर्य पूजा से भी लाभ होता है। रोज सुबह उठकर सूर्यदेव को जल चढ़ाएं और सूर्य मंत्र का जाप करें। ऐसा करने से सूर्यदेव की कृपा आप पर बनी रहेगी और भाग्य मजबूत होगा। खरमास के दिनों में गरीब, जरुरतमंद और पशु-पक्षियों को अन्नदान करना चाहिए।

दान का विशेष महत्व

हिंदू धर्म में पौराणिक मान्यता है कि दान करने से हमारे अच्छे कर्म बढ़ते हैं और इसका फल हमें मृत्यु के बाद भी मिलता है। खासतौर पर खरमास में जब शुभ काम करने की मनाही होती है, तब दान जरूर करना चाहिए। इससे जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

टिप्पणी करे