मलबे में कराह रही अहिल्या बावड़ी को मिला जीवनदान

जल गंगा अभियान: IDA ने 250 साल पुरानी बावड़ी को संवारा

🔺कीर्ति राणा इंदौर। इंदौर विकास प्राधिकरण को भी विश्वास नहीं था कि कनाड़िया क्षेत्र में फोनिक्स मॉल के पीछे उसके द्वारा जो टीपीएस-5 (टॉउन प्लानिंग स्कीम) को अमल में लाने के दौरान मलबा-कीचड़ हटाने के दौरान होल्कर रियासत वाली 250 साल पुरानी बावड़ी की सौगात मिल जाएगी।वर्षों से मलबे में दबे होने के कारण कराह रही इस बावड़ी का जल गंगा अभियान में प्राधिकरण ने रूप निखार दिया है।बहुत संभव है कि मुख्यमंत्री डॉ यादव भी इस बावड़ी को मिले जीवनदान को देखने-अधिकारियों की पीठ थपथपाने इंदौर आएं।

सतत कटती कॉलोनियों, विकास की होड़ का असर शहर के पुरातन जल स्त्रोत पर हुआ है। जलगंगा अभियान में ऐसी पुरानी बावड़ी-कुओं आदि के जीर्णोद्धार की शुरुआत हुई है। प्राधिकरण ने कनाडिय़ा रोड पर जो टीपीएस-5 घोषित की है, उसमें चल रहे विकास कार्य में इस बावड़ी का पता चला है। प्राधिकरण सीईओ आरपी अहिरवार ने ‘प्रजातंत्र’ से चर्चा में बताया लगभग 250 साल पुरानी जो ऐतिहासिक अहिल्या बावड़ी मिली है, वो कूड़े-कचरे, गंदगी और मलबे में दबी हुई थी। जल संवर्द्धन अभियान में जब साफ-सफाई कराई गई तो बावड़ी का स्वरूप नजर आने लगा।

🔹अहिल्यादेवी ने कराया था निर्माण

आसपास के ग्रामीणों से हमने जब जानकारी निकाली तो पता चला कि ग्रामीणों से जानकारी अनुसार उक्त बावड़ी के समीप एक कच्चा रास्ता था, जो ग्राम कनाडिया की ओर जाता था। ग्रामीण लोगों की पानी की व्यवस्था हेतु राजमाता अहिल्या बाई द्वारा उक्त बावड़ी का निर्माण कराया गया था ।पहले इस पूरे क्षेत्र में पानी की आपूर्ति इसी बावड़ी से होती थी, मगर वर्षों से यह बावड़ी बंद पड़ी है। हालांकि अभी भी पानी की पर्याप्त आवक है।

🔹वॉटर लेवल बढ़ाने में मदद मिलेगी

प्राधिकरण को भी बावड़ी में भरा वर्षों पुराना गंदा पानी निकलवाना पड़ा, ताकि जीर्णोद्धार का काम किया जा सके। लगभग ढाई से तीन लाख लीटर पानी इस बावड़ी में आसानी से संग्रहित किया जा सकेगा, जिससे पर्यटन स्थल के साथ-साथ जल संग्रहण क्षमता बढ़ाने में भी इस बावड़ी से मदद मिलेगी। बावड़ी के जीर्णोद्धार के साथ प्राधिकरण इसके आसपास के क्षेत्र में बगीचा तैयार कर रहा है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया हाल ही में मियावाकी पद्धति से पौधारोपण कर चुके हैं। बावड़ी में लगाए गए पुराने पत्थर उखड़ गए थे उनकी जगह नए पत्थर लगाए जा रहे हैं। टूटी दीवार, फर्शी के साथ-साथ आर्च की भी मरम्मत की जा रही है।

🔹अहिल्या बावड़ी की जानकारी

40 मीटर लंबाई

9.5 मीटर चौड़ाई

15 मीटर गहराई (अंतिम गहराई पीछे की ओर)

7.5 औसत गहराई

2850m3 कुल आयतन

2.8 एमएलडी क्षमता

🔹बावड़ी के आसपास बगीचा विकसित करेंगे

शासकीय सेवा में कुछ काम ऐसे होते हैं जिनसे मन को संतुष्टि मिलती है। इस पुरातन बावड़ी को संवार कर प्राधिकरण की टीम को ऐसा ही सुकून मिला है।बारिश के मौसम में बावड़ी में पानी की आव भी बढ़ना तय है।इस बावड़ी के आसपास सौंदर्यीकरण के साथ बगीचा विकसित करने की योजना है।

-आरपी अहिरवार, सीईओ इंदौर विकास प्राधिकरण

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