यशिका दुबे
दुनिया में अनेक धर्म और संप्रदाय हैं। सभी के अपने-अपने सिद्धांत, नियम और प्रादुर्भाव की कहानी है। भारत में हिंदू धर्म के बहुसंख्यक अनुयायी है। हिंदू धर्म जिसे ”सनातन धर्म” भी कहते हैं दुनिया के सबसे पुराने और प्राचीन धर्मों में से एक है। हिंदू धर्म ”सर्वे भवन्तु सुखिनः” के भाव से सम्पूर्ण मानवता के कल्याण की विचारधारा रखता है। समावेशी प्रकृति, आध्यात्म की गहराई और बाध्यता के स्थान पर अनुसरण की स्वतंत्रता इसे एक विशिष्ट स्थान प्रदान करती है। हिंदू धर्म में 33 कोटि देवता हमारी जीवन शैली के हर अंश से जुड़े हैं। प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का भाव हिंदू धर्म को सभी धर्मों से अलग स्थान पर रखता है। हम जल, वायु, धरती, आकाश और अग्नि को भी देवताओं के रूप में मानते हैं। हमारे धर्म में हमारे शरीर को इन पंच तत्वों से मिलकर बना हुआ माना जाता है।

हिंदू धर्म को किसी मानव ने नहीं बनाया है, अपितु यह शाश्वत, प्राकृतिक और नैतिक नियमों पर आधारित है। हिंदू धर्म कहता है कि ईश्वर एक है परंतु उसके रूप अनेक हैं। इस प्रकृति के कण-कण में ईश्वर विद्यमान है, जो हमें सतत ऊर्जा और जीवन देता है। हिंदू धर्म में कहा गया है कि मनुष्य जैसे कर्म करता है, वैसा ही उसे फल मिलता है। आत्मा अमर है लेकिन आपके कर्मों के अनुसार वह जन्म-मृत्यु के चक्र से गुजरती है। हिंदू धर्म के अनुसार मानव जीवन के चार प्रमुख लक्ष्य हैं- धर्म यानि हमारे कर्तव्य, अर्थ यानि जीवन में धन और सफलता, काम यानि इच्छाओं की पूर्ति और अंतिम है मोक्ष यानि आत्मा की शरीर से मुक्ति। मानव में समाहित आत्मा को ही परमात्मा की उपमा देना हिंदू धर्म की सरलता और सहजता को परिभाषित करता है। वसुधैव कुटुंबकम यानि पूरी पृथ्वी एक परिवार है कि भावना रखने वाला हिंदू धर्म सभी जीवों के प्रति दया और अहिंसा को मानवता के लिए अतिआवश्यक मानता है।

